महामारी ने भारत समेत एशिया के देशों को यूरोप का गुलाम कैसे बनाया.....

 आज करोना  वायरस पूरी दुनिया को घर में बंद कर रखा है और हम लोगों को एक नई दुनिया का एहसास करा रही है जो घर में बंद रहती है। क्या आप जानते हैं बरसों पहले ऐसे ही कई बार ऐसा आई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का नक्शा ही बदल दिया तो आइए जानते हैं उनके बारे में.....
               1.  चेचक से अमेरिका में मौत
यूरोपीय देशों ने 15वीं सदी के अंत तक अमेरिकी महाद्वीपों में उपनिवेशवाद का प्रसार करते हुए अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। उपनिवेशवादी अपने साथ चेचक खसरा हैजा मलेरिया प्लेग काली खांसी और टायफस जैसी महामारी अली गए जिन्होंने करोड़ों लोगों की जान ली।
 दुनिया के तापमान में कमी: आबादी कम होने जाने की वजह से खेती कम हो गई एक बड़ा इलाका खुद ही कुदरती तौर पर दोबारा बड़े  चारगाहो और जंगलों में तब्दील हो गया इतने बड़े पैमाने पर पेड़ पौधे उगाने की वजह से कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नीचे आ गया और वैश्विक तापमान में कमी आई जिससे लघु हिमयुग कहा गया।

      2. मिंग राजवंश का पतन चीन मे
1641 मैं उत्तर चीन में प्लेग से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई थी। साथ में टिडीयो के प्रकोप से फसलें तबाह हो चुकी थी। लोगों के पास खाने को अनाज नहीं था इसी बीच उत्तर से आने वाले आक्रमणकारियों ने चीन से मिंग राजवंश को पूरी तरह उखाड़ फेंका। बाद में मंचूरिया के किंग वंश के राजाओं ने संगठित तरीके से चीन पर आक्रमण किया और मिंग राजवंश को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

       3. पश्चिमी यूरोप का हुआ शक्तिशाली उदय                    ब्लैक डेथ के बाद
14वीं सदी के पांचवें और छठे दशक में प्लेग की महामारी ने यूरोप में मौत का तांडव किया था ।इस के कहर से यूरोप की एक तिहाई आबादी काल के गाल में समा गई। ब्लैक दैत्य यानी ब्यूबोनिक प्लेग से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत के कारण खेतों में काम करने के लिए उपलब्ध लोगों की संख्या बहुत कम हो गई ।इससे जमीदारों को दिक्कत होने लगी पश्चिमी यूरोप के देशों की सामंतवादी व्यवस्था टूटने लगी।
 मजदूरी प्रथा ने लिया जन्म: इस बदलाव ने मजदूरी पर काम करने की प्रथा को जन्म दिया जिसके कारण पश्चिमी यूरोप ज्यादा आधुनिक व्यापारिक और नगदी आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ा।
 समुद्री यात्राओं की शुरुआत: पश्चिमी यूरोपीय देशों ने साम्राज्यवाद की शुरुआत की जब अन्य इलाकों में गए तो उन्हें अर्थव्यवस्था को और बढ़ाने का मौका मिला ।फिर उपनिवेशवाद भी शुरू कर दिया।इन्हीं समुद्री यात्राओं के द्वारा वह दूसरे देशों में पहुंचे  जिनमें से एक वास्कोडिगामा भी थे  जो भारत आए  और उसके बाद दूसरे अंग्रेज आए  और फिर भारत को गुलाम बनाया ।ऐसा ही उन्होंने दूसरे देशों के साथ किया और देखते देखते  आधी दुनिया गुलाम  बन गई।
 विश्व में यूरोप का दबदबा पड़ा: अर्थव्यवस्था के आधुनिकरण इतने उन्हें एक नई तकनीक विकसित करने को मजबूर किया। उपनिवेश बनाए और वहां से जो कमाई की उसके बूते ही पश्चिमी यूरोपीय देश दुनिया में ताकतवर बने। उसी तरक्की के बूते पश्चिमी यूरोप के बहुत से  आज भी बहुत ताकतवर है।
   
4. फ्रांस के खिलाफ हैती की बगावत और येलो फीवर
1801 कैरेबियाई देश हैती  में यूरोप की औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ यहा के बहुत से गुलामों ने बगावत कर दी। अंत में तुसैंत लोवरतूर का फ्रांस के साथ समझौता हुआ। वह हैप्पी का शासक बन गया। फ़्रांस में नेपोलियन दोनापाट ने  हैती पर कब्जा जमाने के लिए सेना भेजी। यह सैनिक पीत ज्वर के प्रकोप से खुद को नहीं बचा पाए। यूरोप के सैनिकों के पास कुदरती तौर पर इस बुखार को झेलने की वह ताकत नहीं थी जो अफ्रीका मूल के लोगों में थी।
अमेरिका का क्षेत्रफल दोगुना हुआ:  हैती पर कब्जे में नाकाम अभियान के 2 साल बाद ही फ्रांस के लीडर ने 21लाख वर्ग किलोमीटर इलाके के वाले कैरेबियाई दीप को अमेरिका की नई सरकार को बेच दिया। इसे लुईसियाना पर्चेज के नाम से भी जाना जाता है जिसके बाद नए देश अमेरिका का इलाका बढ़कर दोगुना हो गया।
 
5. अफ्रीका के लिए काल बना राइंडरपेस्ट
 अफ्रीका में पशुओं के बीच फैली एक  महामारी ने यूरोप देश को यहां अपना  साम्राज्य बनाने में मदद की।1888 और 1897 के बीच राइंडरपेस्ट नाम के वायरस ने अफ्रीका में लगभग 90 फीसद पालतू जानवरों को खत्म कर दिया।
 दिखने लगा दुष्प्रभाव: यहां के समाज में बिखराव आ गया भुखमरी फैल गई इस ने यूरोपीय देशों के लिए अफ्रीका के एक बड़े हिस्से पर अपने उपनिवेश स्थापित करने का माहौल तैयार कर दिया। साल 1900 तक अफ्रीका के 90 फीसद हिस्से पर अपनी  औपनिवेशिक ताकतों का नियंत्रण हो गया था। यूरोप देशों को अफ्रीका की जमीनें हड़पने में राइंडरपेस्ट वायरस के प्रकोप से भी काफी मदद मिली।
        6. 1918 में स्पेनिश फ्लू
 1918 में फैली स्पेनिश ब्लू ने 5करोड़ जिंदगीया लील ली उस समय की दुनिया की आबादी में यह 2.5 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी इसमें 18 लाख भारतीय मारे गए थे या किसी भी देश में मौतों का सर्वाधिक आंकड़ा था अपने तीन हमलों में इसने दुनिया को झकझोर दिया। 
1918 के शुरुआती महीनों में इसका पहला लेकिन पहला प्रकोप हुआ अगस्त के आखिरी दिनों में दूसरा घातक प्रहार किया 1919 के शुरुआती महीनों में इसका तीसरा और आखिरी हमला हुआ जिसकी  भयावहता पहले और दूसरे चरण के मिले-जुले स्तर की रही मध्य सितंबर और मध्य दिसंबर 1918 के बीच के 13 हफ्तों में इसने सबसे ज्यादा जाने लिए चौधरी सदी में ब्लैक डेथ महामारी के बाद अब तक ज्ञात इंसानियत इतिहास में यह सबसे खतनाक महामारी रही।
 बदले नियम और विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना: इसी महामारी के बाद तमाम देश सभी के लिए सोशलाइज मेडिसिन हेल्थ केयर की शुरुआत पर विवश हुए रूस पहला देश बना जिसने केंद्रित हेल्थ केयर प्रणाली की शुरुआत की धीरे-धीरे जर्मनी फ्रांस और ब्रिटेन इस के अनुगामी बने अमेरिका ने एक दूसरा रास्ता अख्तियार किया इसने नियुक्त  आधारित इंश्योरेंस स्कीम लागू की। कमोबेश सभी देशों ने अपने हेल्थ केयर को मजबूत और विस्तार करने का काम शुरू किया 1920 में कई देशों ने स्वास्थ्य मंत्रालय का गठन किया इसी दौरान तबके लीग ऑफ नेशन की वैश्विक स्वास्थ्य पर नजर रखने की एक शाखा भी बनी इसे आज विश्व स्वास्थ्य संगठन के नाम से हम जानते हैं


                 7. करोना वायरस
चीन से निकला करोना वायरस आज पूरी दुनिया को हिला चुका है आज पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से लेकर रहन-सहन सब बदल चुका है अभी इसका आकलन और भी करना जरूरी है कि आने वाले कल में यह कितना प्रभाव करेगा।
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महामारी ने भारत समेत एशिया के देशों को यूरोप का गुलाम कैसे बनाया..... महामारी ने भारत समेत एशिया के देशों को यूरोप का गुलाम कैसे बनाया..... Reviewed by ARJUN KUMAR on April 25, 2020 Rating: 5

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