अभी कुछ दिन पहले राम मंदिर निर्माण की नींव रखी गई, जिसका का भूमि पूजन हुआ जिसमें जय श्रीराम के नारे पूरे देश में गूज उठे, इस ऐतिहासिक दिन के लिए मै पूरे भारतवर्ष को बधाई देना चाहता हूं। जैसे कि कई पुराणो ग्रंथों में अयोध्या का नाम मिलता है इसमें यह दर्ज है कि श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ। वैसे भी अयोध्या हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र स्थल है। करोड़ों लोगों की आस्था इस जगह से जुड़ी है। पहले तो इस जगह पर मुस्लिम और हिंदुओं में ही विवाद था पर अब इस विवाद मे बौद्ध धर्म के लोग भी शामिल हो गए हैं। उनका दावा है कि राम जन्मभूमि से पहले यहां पर बहुत बिहार था। इसके साथ ही पूरे देश में यह बहस छिड़ गई है कि क्या सच में राम जन्मभूमि के पास बौद्ध विहार था या सिर्फ यह मनगढ़ंत बातें हैं। पहले तो बस ऐसे ही लग रहा था पर जब से मीडिया में खबर आई है कि राम जन्म भूमि की खुदाई में बौद्ध धर्म के अवशेष निकले हैं, साथ में सम्राट अशोक के समय के अवशेष भी निकले हैं। अब इन सब बातों में कितनी सच्चाई है यह कहना बहुत ही मुश्किल है पर हकीकत यह भी है जो वस्तुएं निकल रही हैं या बुद्ध की मूर्तियां, वह तो बौद्ध विहार की ओर ही इशारा कर रहे हैं।
जब इस बात के लिए हिंदू धर्म के लोगों से पूछा गया उन्होंने कहा वहां ऐसी कोई वस्तु नहीं निकली है जो बौद्ध धर्म से संबंधित हो। हिंदू धर्म के महंत और संतों ने बौद्ध धर्म के सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया। यहां तक की देश की जो मुख्य मीडिया है वह भी इस खबर को नहीं दिखा रही है जबकि इस बात की चर्चा पूरे देश में रह रहे बौद्ध धर्म के लोगों के बीच में चल रही है। कुछ ऐसी बातें हैं जो अयोध्या में बौद्ध विहार होने का प्रमाण पेश करती हैं ,जोकि कुछ मुख्य समाचारों में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। मैं अपनी बात सिर्फ अपने ख्यालों से नहीं कह रहा इसके लिए मैं कुछ सबूत भी पेश करना चाहूंगा जो मैंने कुछ मुख्य समाचारों से लिया है। कई समाचार पत्रों में बहुत से लोगों ने बौद्ध विहार के पक्ष में अपनी बातें कहीं हैं तो मैं नीचे बता रहा हूं:-
अयोध्या में भगवान बुद्ध की मूर्ति मिली, दैनिक जागरण
अंबेडकर नवयुवक दल के प्रमुख बंसीलाल प्रेम जी और सरपंच राजीव कुमार लवली ने कहा कि राम मंदिर परिसर में बुध भगवान की प्रतिमा को रखा जाए। उन्होंने बताया कि पांचवी सदी में अयोध्या को बुध स्थल कहा गया, 1862-63 के पहले सर्वे में कनिंघम ने बौद्ध विहार बताया था, फिर अयोध्या की पहली खुदाई में 1969-70 मे प्रोफेसर अवध किशोर ने बौद्ध विहार बताया था। और अब तो सीधे-सीधे भगवान बुध के मूर्तियों के अवशेष निकल रहे हैं। इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है। लुधियाना ,पंजाब
मौर्य समाज के लोगों ने राम जन्मभूमि को बताया बौद्ध विहार, नवभारत टाइम
2018 में अयोध्या निवासी विनीत कुमार मौर्या ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कीl इस याचिका में दावा किया कि अयोध्या के नीचे जितने भी दबे हुए अवशेष हैं वह बौद्ध काल और अशोक सम्राट के संबंधित है। दावे में उन्होंने एएसआई के दावे का भी हवाला दिया जिसमें बुध की मूर्तियों को स्वीकार किया गया है। इस याचिका में उन्होंने यह भी बताया कि खुदाई में 50 गड्ढों में कभी भी हिंदू धर्म के अवशेष नहीं मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
अयोध्या ,उत्तर प्रदेश
वैसे इसमें जिस बात का हवाला दिया गया है वह लगभग सभी लोग जानते होंगे फिर भी जिन को नहीं पता है वह इस लेख को पढ़कर जान लें ।
बात सदियों पुरानी है अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए कोरिया गई थी। उस समय उनकी उम्र केवल 16 वर्ष की थी। उनका विवाह तत्कालीन करक वंशी राजा किम सोरो के साथ हो गया था।
कोरिया के पौराणिक इतिहास में यह बात दर्ज है कि 2000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना पानी के रास्ते कोरिया आई थी। कोरियाई लोगों ने उनकी नाम और उस पत्थर को भी संभाल रखा है जिसे वह नाव में साथ लाई थी। इस घटना का वर्णन चीन के पौराणिक दस्तावेजों में भी मिलता है।
हालांकि ऊपर की घटना का वर्णन हमारे किसी पुराणो या ग्रंथों में नहीं मिलता। 2018 की बात है भारत में दक्षिण कोरिया से एक दल आया था जिसने उत्तर प्रदेश के सरयू नदी के सामने उस राजकुमारी की प्रतिमा स्थापित की ,इस प्रतिमा का अनावरण उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। अगर कोई आई और चीन की पौराणिक ग्रंथों की बात माने तो उस समय अयोध्या में बहुत धर्म का वर्चस्व था क्योंकि जो रानी कोरिया गई थी वह बौद्ध धर्म का प्रचार करने गई थी अर्थात उस समय किसी बौद्ध राजा का राज्य था। और जहां जहां बौद्ध का नाम हुआ वहां वहां स्तूप जरूर बना है याद करें सम्राट अशोक के 84000 स्तूप कहां गए।
अगर यही सच है मान भी लेते हैं अयोध्या राजा राम की जन्मभूमि थी तो निष्पक्ष होकर जो भी वहां पर खुदाई हो रही है उसकी जांच होनी चाहिए और जो इंडियन बौद्धिक सोसायटी यह मांग कर रही है कि इसकी खुदाई यूनेस्को की देखरेख में हो। 2020 में भी इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। यह याचिका डॉक्टर बी आर अंबेडकर के पणपोते राजरत्न आंबेडकर ने की पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी याचिका को खारिज कर दिया।
सच क्या है यह आम जनता को कैसे पता चलेगा क्योंकि जिन पर आरोप हैं वही लोग उसकी खुदाई में शामिल है। हकीकत जो भी हो पर अगर किसी का कोई सवाल है तो उसका उसको जवाब मिलना चाहिए। अगर बौद्ध धर्म के लोग इसकी मांग कर रहे हैं तो सरकार को भी इस की तरफ ध्यान देना चाहिए था। असली रामराज वही होता है जिसमें सब की सुनी जाती है और जिस में सब को बोलने का अधिकार होता है।
क्या अयोध्या भगवान बुद्ध की है....
Reviewed by ARJUN KUMAR
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August 24, 2020
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August 24, 2020
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Nicely written...good information..
ReplyDeleteNice
ReplyDeletenice
ReplyDeleteI don't know hindi
ReplyDeleteOk friend it's ok,thank for visited my blog
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ReplyDeleteGood one
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ReplyDeleteWell Written ...Keep it Up..
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ReplyDeleteVery good information
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