700अध्यापकों की मौत

यूपी के पंचायत चुनाव में 700 से अधिक अध्यापकों की मौत हो गई है कोविड-19 की वजह सेl इस बात की पुष्टि उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने की हैl इस संघ में 5 लाख प्राथमिक अध्यापक शामिल हैl संधि के अनुसार 15 अप्रैल को पहले फेस में हुए चुनाव के बाद ही अध्यापक बड़ी संख्या में कोविड-19 से संक्रमित होने लगे थेl इसको देखते हुए इस संघ ने राज्य सरकार वह चुनाव आयोग से अपील की थी कि उसको रोका जाए। पर इसकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। इन चुनाव को रोकने के लिए एक और शिक्षा संघ उत्तर प्रदेश शिक्षा महासंघ ने अपील की थी कि यह पंचायती चुनाव इस महामारी के कम होने के बाद कराया जाए।
                    सवाल यह है कि इन 700 से अधिक अध्यापकों की मौत का जिम्मेदार कौन है और इन 700 से अधिक अध्यापकों के परिवार की जिम्मेवारी कौन संभालेगा। क्या सरकार या चुनाव आयोग इस भयानक स्थिति को देखकर यह समझ नहीं पाया की यह समय चुनाव कराने का नहीं है। सवाल यह भी है कि इन 700 अध्यापकों को क्या कोविड-19 बीमा सुरक्षा मिलेगा या नहीं। जब देश में ऐसे महामारी का दौर हो स्कूल कॉलेज सब बंद हो तो चुनाव रुक नहीं सकते थे।
इनकी मौत पर प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया है मानवता के खिलाफ जुर्म है। मायावती ने ट्वीट किया है इन अध्यापकों के परिवार को सुरक्षित नौकरी दी जाए। वैसे इनकी मौत के पीछे बहुत हद तक हमारे कोर्ट भी जिम्मेदार हैं। जैसा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि 30 अप्रैल तक पंचायती चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए पर समय की स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट यह भी आदेश दे सकता था कि चुनाव को रोका जाए पर उसने नहीं दिया। ऐसा नहीं है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में नहीं गया था यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया था तब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य इलेक्शन कमिशन से पूछा था कि क्या आप कुछ दिन के लिए रुक नहीं सकते या आप आगे बढ़ना चाहते हैं, तब राज इलेक्शन कमीशन ने यह कहा था कि हम आगे बढ़ना चाहेंगे अर्थात सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक नहीं लगाई। अध्यापक संघ ने इस पंचायती चुनाव का बहिष्कार करने के लिए कहा था परंतु इस चुनाव में शामिल अध्यापकों ने ऐसा नहीं किया क्योंकि कोर्ट का ऑर्डर था 30 अप्रैल तक चुनाव संपन्न कराए जाएं।
यह बात विचार करने वाली है कि यूपी में पंचायती चुनाव से पहले कोविड-19 का संक्रमण केवल यूपी के शहरों तक सीमित था परंतु जैसे ही पंचायती चुनाव हुए अब कोविड-19 का संक्रमण गांव गांव तक यहां तक कि दूरदराज गांव तक भी फैल चुका है। जबकि इससे पहले ऐसे हालात नहीं थे। एक अध्यापक ने यह कहा है कि बड़े लोगों के बीच में छोटे लोगों की बातें नहीं सुनी जाती। उनको कहने का अर्थ साफ है कि छोटे-मोटे लोगों की बात कोई नहीं सुनता सारे फैसले बड़े लोग ही करते हैं और भुगतना छोटे लोगों को ही पड़ता है। अभी जो 700 से अधिक अध्यापकों की मौत की संख्या है वह और अधिक भी हो सकती है फिलहाल 700 बताई जा रही है। जो प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं और जश्न में डूबे हुए हैं क्या उनको इस बात से कोई फर्क पड़ता है कि जिन्होंने यह चुनाव संपन्न करवाया वह मर गए हैं या उनके परिवार पर क्या बीत रही होगी क्या उनको रत्ती भर भी इसका फर्क है मुझे लगता है नहीं होगा क्योंकि इंसान बन पूर्ण रूप से स्वार्थी हो चला हैl
              ऐसा नहीं है कि चुनाव आयोग ने इसके लिए कोई नियम नहीं बनाए थे नियम तो बनाए थे पर पालन गांव वाले कहां करते हैं। नियम यह भी था कि जो प्रत्याशी जीतेगा वह जीत का जश्न या जुलूस नहीं निकालेगा परंतु हुआ सब इसके उल्टा गांव में जीत का जुलूस निकाला गया कोविड-19 के नियमों का धज्जियां उड़ाया गया। नतीजा यह है कि अब यूपी के गांव में भी बड़ी संख्या में कोविड-19 के मरीज मिल रहे हैं।

700अध्यापकों की मौत 700अध्यापकों की मौत Reviewed by ARJUN KUMAR on May 04, 2021 Rating: 5

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