आप जो ऊपर तस्वीर देख रहे हैं इस तस्वीर को देखकर आप गलत ना समझे और ना ही कोई गलत भावना रखें इस तस्वीर के पीछे बहुत ही भावनात्मक भरी कहानी है यह कहानी यूरोप देश की है । रोम के एक इतिहासकार वलेरियस मैक्सिमस ने अपनी किताब factorum Ac Dictorum Memorabilium इस किस्से को दर्ज किया है।
पुराने समय में रूम में एक व्यक्ति रहता था जिसका नाम साइमन था । एक जुर्म की सजा में रोम के राजा ने उसको आजीवन भूखे रहने की सजा दी थी यानी जब तक वह व्यक्ति भूखे मर नहीं जाता तब तक उसको कुछ भी देना नहीं है एक तरह से उसे मौत की सजा ही कह सकते हैं। सैनिकों को यह आदेश था कि साइमन से किसी को भी मिलने ना दिया जाए जब तक वह मर ना जाए। साइमन की एक लड़की भी थी जिसका नाम पेरू था जब पेरू को यह बात पता चली कि उसके पिता को मरते दम तक भूखा रहने की सजा मिली है यह समाचार सुनते हैं पेरू बहुत ही घबराई और डरी हुई राजा के पास गई और उसने अपने पिता को रिहा करने के लिए प्रार्थना की। परंतु बेरहम राजा ने उसकी एक न सुनी फिर पेरू ने राजा से अपने पिता से मिलने के लिए आज्ञा मांगी, उसने अपने पिता से मिलने के लिए दिन में तीन बार का समय मांगा। परंतु राजा इस बात पर भी सहमत नहीं हुआ। पेरू राजा के पैर पकड़े रोने लगी और अपने पिता से मिलने के लिए भीख मांगने लगे बहुत मशक्कत करने के बाद राजा ने उसकी बात को मान लिया परंतु राजा ने यह आदेश भी दिया कि वह अपने पिता से दिन में सिर्फ दो बार ही मिल सकती है वह भी खाली हाथ यानी वह कुछ भी अपने साथ नहीं ले जा सकती।पेरू ने राजा की बात मान ली और उसका धन्यवाद किया।
इस तरह से पेरू रोज दिन में दो बार अपने पिता से मिला करते थे कुछ दिन बाद उसने यह देखा कि उसके पिता के हालात दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं। साइमन के गाल और उसका पूरा शरीर धीरे-धीरे सूख रहा था और उसके मुंह से आवाज भी बहुत धीमी गति से निकल रही थी मानव जैसे कि उसके प्राण कभी भी निकल सकते हैं यह हालात देखकर पेरू को बहुत ज्यादा दुख हुआ। वह अपने पिता को हर हाल में बचाना चाहती और उसको कुछ भी सूझ नहीं रहा था कि वह क्या करें क्योंकि वह जब भी अपने पिता से मिलने आती थी तो बाहर खड़े सैनिक उसकी तलाशी लेते थे उसके बाद ही उसको अंदर जाने देते थे। पेरू एकदम से असहाय और बेबस हो गई क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसके पिता की है मृत्यु हो रही थी परंतु वह कुछ कर नहीं पा रही थी। बहुत दिनों तक सोच और समझने के बाद उसने यह फैसला किया कि वह अपने पिता को अपना स्तनपान करा कर जीवित रखेगी क्योंकि उसके पास इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था। पेरू अपने पिता को हर हाल में बचाना चाहती थी इसलिए उसने ऐसा असामाजिक फैसला लिया। फिर वह अपने पिता के पास उससे मिली गई और पिता के सामने उसने अपने स्तन को कपड़े से निकाला और पिता के मुंह में डालने लगी परंतु पिता तो पिता होता है यह सब देख कर वह अचंभित हो गया और शर्मिंदा भी हुआ उसने ऐसा करने से मना किया।पेरू ने उसको बहुत समझाया और कहां की आप को जीवित रहने के लिए यह सब करना ही पड़ेगा पर साइमन ने ऐसा करने से मना कर दिया। फिर पेरू ने उसको कहा कि यदि वह ऐसा नहीं करेगा तो वह आत्महत्या कर लेगी क्योंकि अगर उसका पिता जिंदा नहीं रहा तो वह भी जीवित रह कर क्या करेगी। साइमन ने बड़ी बेबसी के साथ यह कार्य किया परंतु उसके इस कार्य में उसको एक जीवनदान भी दे दिया। अब पेरू हर रोज अपने पिता से मिलती और उसको स्तनपान करा कर चली जाती।
देखते ही देखते महीने बीत गए परंतु राजा को साइमन की मौत की खबर सुनाई नहीं दी। राजा ने तुरंत ही अपने सैनिकों को आदेश दिया और कहां की देखो वह कब मरेगा वह अब तक मना क्यों नहीं। सैनिक साइमन के पास गए और देखा कितने दिनों में वह कमजोर हुआ है परंतु मौत के कगार पर अभी नहीं पहुंचा है या देखकर सैनिक बहुत हैरान हो गई क्योंकि ऐसा कभी होता नहीं है। यह बात राजा को बताई गई तो राजा को शक हुआ कि पेरू अपने बाप को बचाने के लिए कुछ जादू टोना करवा रही है। राजा ने सैनिकों को पेरू पर नजर रखने के लिए कहा। सैनिक ने बड़ी चालाकी से जहां साइमन बंदी था उस जगह पर किसी कोने अपने आप को छुपा लिया यह देखने के लिए की आखिर पीरू कौन सा जादू कर रही है जिससे साइमन अब तक जिंदा है। कुछ समय बीतने के बाद पेरू अपने पिता से मिलने के लिए आई। वह पिता से मिली इसके बाद उसने उसको स्तनपान कराया यह देख कर सैनी की आंखें फटने लगी। उसने तुरंत ही इन दोनों को पकड़ा और पेरू को भी जेल में डाल दिया। यह खबर तुरंत राजा को दे दी गई राजा ने यह फैसला किया इन दोनों को सीधे सूली पर चढ़ा दिया जाएगा भरी सभा में जिससे पूरे राज्य में यह संदेश जाए कि बाप बेटी के रिश्ते को कलंक करने का नतीजा क्या होता है। यह बात पूरे राज्य में आग की तरह फैल गई।
सभा का आयोजन होने से पहले पूरे राज्य में यह चर्चा का विषय बन गया कि ऐसा करके पेरू और साइमन ने कितना गलत किया है। बड़ी संख्या में लोग इनके विरोध में थे और इनको मौत की सजा देने के पक्ष में थे लगभग पूरे राज्य में यही मांग चल रही थी। परंतु उनमें से कुछ ऐसे लोग ही थे जिन्होंने इस को दूसरी नजर से देखा और यह पाया कि यह कार्य बेटी और पिता के प्रेम की सच्चाई पर किया गया कार्य क्योंकि पेरू हर हाल में अपने पिता साइमन को बचाना चाहती थी और उसके पास बचाने के लिए इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इस बेटी और पिता के प्रेम की भावनाओं को दूसरे लोगों तक भी कुछ लोगों ने पहुंचाया और देखते ही देखते एक बड़ी संख्या में लोग इस बात को स्वीकार करने लगेगी कि जो कुछ भी पेरू ने किया वह गलत नहीं किया है। सभा के आयोजन से पहले माहौल धीरे-धीरे पेरू और साइमन के पक्ष में जाने लगा। उनके इस व्यवहार को पूजनीय और आदरणीय धीरे धीरे समझा जाने लगा। यह बात राजा तक भी पहुंच गई की राज्य में बहुत बड़ी संख्या इन दोनों के पक्ष में हैं अगर राजा ने उनके साथ कुछ भी गलत किया तो राज्य में विद्रोह हो जाएगा। राजा ने भी सही समय को भाप लिया और उसने सभा का आयोजन तो किया परंतु उस सजा हमें इन दोनों की सजा को माफ कर दिया और एक सम्मान के साथ इन दोनों पिता और पुत्री को रिहा कर दिया गया। यह किस्सा आज भी रोम के कोने-कोने में मशहूर है कई जगह इसकी आपको पेंटिंग और मूर्तियां भी मिलेंगी पूरे रोम मिलेंगी।
इस पिता और पुत्री के पवित्र और प्रेम भरे रिश्ते को गलत नजर से नहीं देखना चाहिए। बेशक यह समजिक रीति-रिवाजों से विपरीत था परंतु इस कार्य को करने का जो उद्देश्य था वह किसी भी सामाजिक रीति रिवाज से ऊपर है। यदि हम कुछ गलत भी करते हैं परंतु उसका उद्देश्य अच्छा हो तो वह गलत कार्य करने में कोई परहेज नहीं है। यह कहानी यह भी बताती है कि एक पुत्री अपने पिता से कितना प्रेम करती है यह उस समय की बात है और आज का समय कैसा है की पुत्री प्रेम संबंधों के कारण अपने पिता का घर छोड़ कर भाग जाती है और उसके मान सम्मान को तार-तार कर देती है।
बेटी ने बाप को स्तनपान कराया क्यों?
Reviewed by ARJUN KUMAR
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October 02, 2021
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Reviewed by ARJUN KUMAR
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October 02, 2021
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Nice
ReplyDeleteBahut acha likha hai 💯👌
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