कुत्ते का मीट बैन हो गया नागालैंड में....

हाल ही में नागालैंड की सरकार ने कुत्ते के मांस पर पूरी तरह से बैन लगा दिया। अब नागालैंड में कोई भी कुत्ते का मांस ना बेच सकेगा ना खा सकेगा। अगर कोई भी होटल या रेस्टोरेंट में कुत्ते का मांस खाया जाता है तो यह एक दंडनीय अपराध होगा। हर साल लगभग 30,000 कुत्ते दूसरे राज्यों से नागालैंड सप्लाई होते थे। नागालैंड में तरह-तरह के जीवो को खाना कोई नई बात नहीं है।नागालैंड में बिल्ली का मांस भी खाया जाता है। जिनको नहीं पता है वह  जान लें नागालैंड एक जनजातीय राज्य है, यहां पर विभिन्न प्रकार की जन जातियां पाई जाती हैं। इन जातियों की तरह-तरह की परंपराएं ,रीति रिवाज और संस्कृति है जिस में मांस का सेवन करना पवित्र समझा जाता है। नागालैंड के लोगों का यह भी विश्वास है कि कुत्ते के मीट में अच्छा प्रोटीन पाया जाता है।
                                   अब सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर नागालैंड की सरकार ने कुत्ते की मीट पर बैन लगा दिया। दरअसल कुत्तों को प्यार करने वाले बहुत से लोगों ने नागालैंड सरकार को मेल किया ट्वीट किया कि वह कुत्तों के मीट पर बैन लगा दे। हजारों की संख्या में लोगों ने अपना यह संदेश नागालैंड सरकार को दिया। कुत्ते के मीट को बैन करने का अधिक बल मेनका गांधी के एनजीओ" people for animals " से मिला। जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं मेनका गांधी लोकसभा की सदस्य हैं। इन्होंने अपने एनजीओ के द्वारा लोगों को और नागालैंड की सरकार से अपील किया कि नागालैंड में कुत्ते के मीट को बैन लगाया जाए। इसलिए नागालैंड की सरकार ने लोगों की अपील का सम्मान किया और नागालैंड में कुत्ते के मीट को बैन कर दिया। पर क्या नागालैंड सरकार का यह फैसला कानून के तराजू पर खरा उतर पाएगा। क्योंकि नागालैंड के संस्कृति में ही कुत्ते का मीट खाना शामिल है। दूसरा यह कि नागालैंड वह राज्य है जिसको संविधान के अनुच्छेद 371(A) के तहत विशेष राज्य का दर्जा मिला है। अर्थात वह राज्य अपनी मर्जी से अपनी संस्कृति और सभ्यता का पालन कर सकता है बिना किसी रोक-टोक के। 
                                         अब यह भी जानना बहुत आवश्यक है कि आखिर नागालैंड की सरकार ने किस कानून के तहत कुत्ते के मीट को बैन किया है। दरअसल भारत में खाने पीने वाली चीजे एफएसएसएआई के अधीन आती हैं। भारत में यही एफएसएसएआई तय करती है कि क्या खाना है और क्या नहीं खाना है, खाने की गुणवत्ता कितनी होनी चाहिए आदि सब की देखरेख यही करती है। इसी के तहत खाद्य सुरक्षा और मानक( खाद्य उत्पादों के मानकों और खाद्य योजय) अधिनियम 2011 के तहत नागालैंड की सरकार ने कुत्ते की मीट पर बैन ल दिया। क्योंकि एफएसएसएआई के अंदर कुत्ते का मीट शामिल नहीं था इसलिए यह गैरकानूनी भी था। 

नागालैंड में गाय के मीट को बंद क्यों नहीं किया गया:-
भारत में गाय को माता मानने वालों की कोई कमी नहीं है। करोड़ों लोग गाय की पूजा करते हैं और उसको अपनी माता मानते हैं। भारत में उत्तर भारत के लोग और कुछ दक्षिण भारत के लोग ही सबसे ज्यादा गाय को माता मानते हैं। इतनी बड़ी संख्या में गाय को माता मानने के बावजूद भी भारत के 10 राज्यों में गाय के मीट पर बैन नहीं है और इन 10 राज्यों में आप कहीं भी गाय का मीट बिकता हुआ देख सकते हैं और होटलों में गाय के मीट के बोर्ड लगे हुए देख सकते हैं। वे 10 राज्य हैं केरल ,पश्चिम बंगाल, असम ,अरुणाचल प्रदेश ,मणिपुर, मेघालय ,मिजोरम ,नागालैंड, त्रिपुरा ,सिक्किम और एक केंद्र शासित राज्य लक्षदीप में गौ हत्या प्रतिबंध नहीं है। जैसा कि आप देख सकते हैं कि नागालैंड में भी गाय हत्या पर प्रतिबंध नहीं है। इसकी वजह भी  साफ है की नागालैंड में गाय का मीट खाना उनकी संस्कृति का हिस्सा है आप उनकी संस्कृति से उनको दूर नहीं कर सकते।
                                    ऐसा नहीं कि केंद्र की भाजपा सरकार ने इसको बंद करने की कोशिश ना की हो भाजपा की केंद्र सरकार ने कई बार कोशिश की कि इन 10 राज्यों में गाय हत्या बंद  कर दी जाए। जब भाजपा ने ऐसा करने की कोशिश की तो वहां के भाजपा के विधायक, सांसद और कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा देने की धमकी दी दिया।  तर्क यह दिया कि यह उनकी संस्कृति के खिलाफ है और कोई भी सरकार भारतीय संविधान में दीए अधिकार को छीन नहीं सकती। तो भाजपा सरकार ने देखा कि इससे उनको राजनीतिक रूप से बहुत घाटा होगा इसलिए उन्होंने इन 10 राज्यों में गाय हत्या बंद करने की मांग बंद कर दी। ऐसा भी नहीं है कि भारत के हिंदू हैं गाय का मीट नहीं खाते। कई राज्यों में हिंदू भी गाय का मीट खाते हैं वह भी आज से नहीं सदियों से खाते आ रहे हैं। केंद्र सरकार चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती क्योंकि कुर्सी तो सबको प्यारी है।

किसी खाने-पीने पर बैन लगाना कितना सही और कितना गलत:- आपकी खुद की जिंदगी है आप जो मर्जी वह कर सकते हैं इसमें कानून आपको नहीं रोकता बस इतना ध्यान रहे कि आपके रहन-सहन के व्यवहार से किसी दूसरे की भावनाएं आहत ना हो।पर खाने पीने वाली वस्तुओं पर बैन लगाना कितना सही हो सकता है वह भी भारत जैसे विभिनता वाले देश में। तो जानते हैं जानवरों का मांस खाने वालों और जानवरों को प्रेम करने वाले क्या कहते हैं कुत्ते के मीट बैन पर।
जानवरों को प्रेम करने वालों का विचार:-
1. जीव की हत्या करना प्राकृतिक नियमों के खिलाफ है।
2. जैसे मानव एक जीव है वैसे दूसरे जीव भी हैं इसलिए मारना उनको गलत है।
3. यदि आप किसी जीव को जन्म नहीं दे सकते तो आपको किसी जीव की हत्या करने का भी अधिकार नहीं है।
4. इंसानियत की खातिर भी जीवो की हत्या नहीं करनी चाहिए।
5. कुत्ते इंसानों के हजारों साल से दोस्त रहे हैं इसलिए उनके मांस का सेवन गलत है।
6. धर्म शास्त्र के अनुसार भी जीव हत्या पाप समझी जाती हैं।
7. संविधान ऐसे अधिकार नहीं दे सकता जिससे बहुसंख्या आबादी की भावनाएं आहत हो।
8. खाने के लिए बहुत सी चीजें दुनिया में है जो प्राकृतिक ने दिया है इसलिए जीव को खाना गलत है।
9. इंसान का पाचन तंत्र शाकाहारी खानों के लिए बना है ना कि मांसाहारी खाने के लिए।

जानवरों के मांस खाने वालों का विचार:-
1. इंसान आदिमानव काल से ही मांस का सेवन करता आ रहा है तो अब कैसे छोड़ सकते हैं।
2. महाभारत में अर्जुन ने सूअर का शिकार किस लिए किया था, खाने के लिए, तो हमारा खाना गलत कैसे।
3. रामायण में राजा दशरथ जीवो का शिकार करते थे।
4. भारत में जनजातियां बहुत हैं वह शुरू से ही बली और मांस का सेवन करते आ रही । वह अपनी संस्कृति सभ्यता को कैसे छोड़ सकते हैं, बली के द्वारा अपनी परंपराओं को आगे ले जाते हैं और देवताओं को खुश करते हैं।
5. देश संविधान से चलता है किसी के विचारों से नहीं। संविधान ने जिन राज्यों को 371(A) के तहत विशेष राज्य का दर्जा दिया है वह अपनी इच्छा से अपनी संस्कृति सभ्यता का पालन कर सकते हैं।
6. धर्म शास्त्र के अनुसार क्षत्रिय मांस का सेवन कर सकते हैं ,क्योंकि उनको युद्ध करना होता है तो हम लोग क्यों नहीं कर सकते हैं, हम लोग भी तो इंसान ही हैं।
8. जीवों को  खाना कोई पाप नहीं होता क्योंकि वह तो भोजन श्रृंखला में शामिल है। 
9. सिर्फ  कुत्ते, बिल्ली, गाय आदि के मांस पर बैन क्यों, क्या मुर्गी, बकरी ,भैंस, भेड़, सूअर ,मछली आदि जीव नहीं है क्या, बैन  हो तो सब पर बराबर हो। हत्या तो हत्या है चाहे किसी भी जीव की हो।
10. इंसान का पाचन तंत्र शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के लिए बना है ना कि सिर्फ शाकाहारी के लिए।
उपरोक्त दोनों के विचार जानने के बाद आप यह फैसला कर सकते हैं कि दोनों के विचार अपनी जगह सही है । दोनों में से कोई भी पक्ष अपनी जगह गलत नहीं है। फिर भी आपस में यह बात चलती रहती है जो कि कौन शाकाहारी है ,कौन मांसाहारी है ,मेरे ख्याल से यह ठीक नहीं है, बाकी सब की अपनी-अपनी सोच है।

जो शाकाहारी है वह विरोध करें पर जो मांसाहारी है वह किस आधार पर विरोध कर रहा है:- आप ने ट्विटर पर और कई सोशल मीडिया पर लोगों को कुत्ते और गाय के मीट का विरोध करते देखा होगा। वह अपनी सोशल मीडिया की पोस्ट पर गाय और कुत्ते के प्रति बड़ी-बड़ी बातें लिखते हैं। गाय को माता कहते हैं। गाय के बारे में कई गुणकारी बातें भी  बताते हैं। पर ऐसा करना कहां तक सही है । यदि आप पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं तो आप का विरोध करना बिल्कुल जायज है, पर यदि एक तरफ आप बकरी ,मछली, मुर्गा, सूअर आदि का सेवन करते हैं और दूसरी तरफ गौ हत्या और कुत्ते के मीट का विरोध करते हैं। यह कहां तक ठीक है जो आपकी पसंद का है आपको उसकी हत्या से कोई लेना-देना नहीं है,आप उसके मांस का सेवन बड़े मजे से कर रहे हैं और जो आपके मतलब का है वह आपकी मां हो जाती है। जबकि  सभी जीवो की जान एक समान है।

 अगर खाने-पीने पर भेदभाव देखेंगे तो पूरा भारत  अलग-अलग  नजर आएगा:- आपने भारत के संदर्भ में यह बात सुनी होगी अनेकता में एकता वाला देश। अर्थात हमारे देश में बहुत सारी विभिन्नता पाई जाती। जैसे उत्तर भारत के लोग गाय की पूजा करते हैं वही उत्तर पूरब के लोग गाय के मांस का सेवन करते हैं। मुसलमान सूअर का मांस नहीं सेवन करते हैं पर हिंदू सूअर का मांस सेवन करते हैं। कहने का अर्थ यह है कि इतनी सारी विभिन्नताओं के बावजूद हम सब एक हैं, हम सब भारतीय हैं। इसलिए इस विभिन्नता को हमेशा बना कर रखना चाहिए ,जिससे किसी भी नागरिक को यह ना लगे कि उसके साथ भेदभाव हो रहा है और हमारी एकता बनी रहे।
 
पर हकीकत में सभी मनुष्य को शाकाहारी हो जाना चाहिए क्योंकि:- संयुक्त राष्ट्र ने अपने विश्व स्वास्थ्य संगठन में पूरी दुनिया को जोर देकर कहा है कि लोगों को शाकाहारी भोजन का प्रयोग करना चाहिए और मांसाहारी भोजन का परहेज करना चाहिए। इसका कारण यह है कि जो लोग मांसाहारी का सेवन करते हैं वह कार्बन डाइऑक्साइड गैस अधिक छोड़ते हैं जिससे वातावरण में गर्मी बढ़ती जा रही है। वातावरण में गर्मी बढ़ने के कारण  कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं । इसलिए वातावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए शाकाहारी होना अति आवश्यक है। शाकाहारी बनने से एक और फायदा होगा कि जो  जीव विलुप्त होने की कगार पर हैं उनकी संख्या दोबारा बढ़ सकती है क्योंकि इंसान उनका सेवन बंद कर देगा। जैसे व्हेल मछली, गंगा नदी की डॉल्फिन मछली आदि । 
                                        शाकाहारी होना एक बहुत ही अच्छी बात है जो इस धरती को दोबारा सुंदर बना सकता है और मानव सभ्यता को बरसो तक इस धरती पर टीका सकता है। पर इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने विचार किसी दूसरे पर थोपे। हमें ऐसा विचार भी नहीं थोपना चाहिए जिससे किसी की सभ्यता संस्कृति नष्ट होती हो। अगर आपकी अपनी संस्कृति सभ्यता सही है तो दूसरे व्यक्ति की भी संस्कृति सभ्यता सही है। विभिन्न प्रकार के लोग, विभिन्न प्रकार की जातियां ,विभिन्न प्रकार के समुदाय ,विभिन्न प्रकार की संस्कृति ,विभिन्न प्रकार के पहनाव, विभिन्न प्रकार का खान पीन ,विभिन्न प्रकार की भाषा ही हमारी भारत की खूबसूरती है जो इसकी अनेकता को एकता में बनाती है।





कुत्ते का मीट बैन हो गया नागालैंड में.... कुत्ते का मीट बैन हो गया नागालैंड में.... Reviewed by ARJUN KUMAR on July 18, 2020 Rating: 5

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