भारत के वीर सैनिकों को उनकी वीरता के लिए शत शत नमन। अगर बॉर्डर पर वह है तो देश में हम हैं। हमारे घर में दिवाली से लेकर ईद कोई भी खुशियां उनकी ही देन है। अभी हाल में ही हमारे 20 वीर सैनिक लद्दाख में चाइना को मुंहतोड़ जवाब देते हुए शहीद हो गए। मन में दुख है और आक्रोश भी है कि आखिर मेरे देश के यह वीर वीरगति को कैसे प्राप्त हुए। जैसे ही इसकी यह खबर पूरे देश में फैली तो सरकार से लेकर आम लोगों तक एक विरोध शुरू हुआ कि चाइनीस सामान का बहिष्कार किया जाए । मेरे देशवासी सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक चाइनीस समान का बहिष्कार करने का संकल्प ले रहे हैं पर क्या वह सच में ऐसा करेंगे सोचना पड़ेगा क्यों यह कोशिश 1962 से चल रही है। वैसे देखा जाए तो स्वदेशी समानो का प्रयोग करने का आंदोलन महात्मा गांधी ने शुरू किया था। देश आजाद हो गया पर कितने प्रतिशत हम स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करते हैं कि आप सब लोग जानते होंगे, नहीं जानते तो अपने घर में जो जो सामान हैं उन कंपनियों का नाम नेट पर डाल कर देखें सब पता चल जाएगा कि वह कहां की हैं। खैर हम अपने असली मुद्दे पर आते हैं आखिर किस हद तक हम चाइनीस वस्तुओं का बहिष्कार कर पाएंगे। ऐसा करने के लिए पहले हमें ज्ञात होना चाहिए कि किस किस क्षेत्र में चाइनीस वस्तुओं का भारतीय बाजार में कब्जा है और कितना प्रतिशत है तो नीचे कुछ मैं आंकड़े दिखा कर रहा हूं यह हिंदी में मिलने तो मुश्किल थे फिर भी मेरे ख्याल से आप लोग समझ जाएंगे।
ऊपर आप जो तस्वीर देख रहे हैं इसके हिसाब से 68% मोबाइल के बाजार में चाइना कब्जा है। यह आंकड़े 2019 के हैं वर्तमान में 75% मोबाइल के बाजार में चाइना कब्जा हो चुका है। इसके अलावा मोबाइल के छोटे-छोटे पुर्जे और इनको बनाने वाले यंत्र आदि सभी पर चाइना का कब्जा है जिसमें हेडफोन बैटरी आदि शामिल है ।तो क्या आप सभी अपने मोबाइल को तोड़ कर फेंक देंगे यह फैसला तो आपको करना है।
इन आंकड़ों को देखिए कैसे कैसे समय बीतने के साथ हम चाइना से भारी मात्रा में टायरों का आयात कर रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि हमारी साइकिल से लेकर चार चक्के, कार और ट्रक तक लगभग सभी में चाइनीस टायरों का का प्रयोग होता है।
3.ऑटो पार्ट के क्षेत्र में चाइना का कब्जा
आंकड़े के अनुसार आप देख सकते हैं कि 27 परसेंट का कब्जा भारतीय बाजार में चाइना का है। यह हिस्सेदारी सबसे बड़ी है डाटा के अनुसार। जैसे ही चाइनीस वस्तुओं के बहिष्कार की घोषणा हुई उसी समय मारुति और बजाज कंपनियों ने यह ट्वीट किया कि ऐसा करना सही नहीं होगा। क्योंकि अगर ऐसा किया जाता है तो जो कलपुर्जे चाइना से आयात करते हैं वह सस्ते होते हैं अगर वह बंद कर दिया जाए तो दूसरे देशों से मंगवाना पड़ेगा जो बहुत ही महंगे पड़ेंगे इसलिए इन दोनों कंपनियों ने चाइना वस्तुओ के बहिष्कार का समर्थन नहीं किया है।
यह आंकड़ा देखिए यह कहा जा सकता है कि दवाइयों के मामले में हम लगभग पूरी तरह से चाइना पर भी निर्भर है क्योंकि दवाइयां बनाने के लिए जिस एपीआई की आवश्यकता होती है ,वह हम चाइना से आयात करते हैं। इसमें उसकी वर्तमान हिस्सेदारी 70पर्सेंट की हैं। आंकड़ों के अनुसार यह धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है ।हाल ही में सरकार ने इसकी तरफ विशेष ध्यान दिया है और अपने ही देश में एपीआई बनाने के लिए 10 हजार करोड़ का बजट रखा है परंतु हमको खुद की एपीआई बनाने में लगभग 6,7 साल लग जाएंगे। तब तक के लिए हमें कुछ तो करना होगा।
5. सौर ऊर्जा के क्षेत्र में चाइना की हिस्सेदारी
यह समाचार इकोनॉमिक्स टाइम्स से लिया गया है और यह 2017 का है। इसके हिसाब से आप देख सकते हैं कि 87% की हिस्सेदारी सौर पैनल में चाइना की है जो कि वर्तमान में 90 पर्सेंट के करीब पहुंच चुकी है। इसमें भी लगभग हम चाइना पर पूरी तरह निर्भर होते जा रहे हैं। किस आधार पर चाइना वस्तुओं का बहिष्कार किया जाए यह हमें सोचना पड़ेगा।
6. विद्युत यंत्र की वस्तुएं, प्लास्टिक ,केमिकल आदि चाइना वस्तुओं की हिस्सेदारी
इन आंकड़ों के अनुसार यह बात साफ हो जाती है कि विद्युत सामग्री से लेकर एक छोटे से लाइट तक सब कुछ चाइना से मंगाया जाता है। तो ऐसे वस्तुओं का एक समय अचानक से त्याग करना आसान नहीं होगा इसके लिए कोई नियम बनाने की आवश्यकता होगी। पर क्या इस नियम का पालन भारतवासी कर पाएंगे यह तो वक्त बताएगा।
इन सबके अलावा और भी ऐसी बहुत सी वस्तु में है जिनको हम भारतवासी चाइना से मांगते हैं इसमें घर की सुई से लेकर पंखे ,एसी ,घर सजावट की वस्तुएं आदि सभी आती हैं।
यह वो एप्लीकेशन है जो बहुत ही मशहूर हैं भारत के अंदर। हो सकता है इसमे से कोई एक एप्लीकेशन जरूर आपके मोबाइल में हो। करोड़ों भारतीय इस एप्लीकेशन का प्रयोग करते हैं। ना जाने कितने युवा तो पब्जी खेलते खेलते मर गए। टिक टॉक पर न जाने कितने करोड़ों भारतीय अपनी वीडियो रोज डालते हैं। हद तो तब हो जाती है जब हमारे 20 जवानों की शहादत का वीडियो भी इस टिक टॉक पर बन जाता है, उनको शत शत नमन भी टिक टॉक पर किया जाता है। लोगों की तो बात छोड़ो स्वयं भारत सरकार ने भी अपनी आईडी टिक टॉक पर बना रखी है आप नीचे तस्वीर में देख सकते हैं।
अब देखते हैं भारत और चाइना के बीच व्यापार का आयात और निर्यात। यह देखने से पता चल जाएगा कि भारत सरकार कितना चाइना को निर्यात करती है और कितना चाइना से आयात करती है।
भारत के कुल आयात और निर्यात में चाइना की हिस्सेदारी
भारत के कुल आयात और निर्यात में चाइना की हिस्सेदारी
आंकड़ों के अनुसार आप देख सकते हैं कि कितना बड़ा व्यापार में घाटा होता है भारत को। चाइना भारत से हर साल अरब कमाता है। दूसरी तरफ चाइना भारत की वस्तुओं को आसानी से अपने बाजार में प्रवेश नहीं देता। उसने कई वस्तुओं पर बहुत ऊंची दर से कर लगा रखा होता है जिसे से भारतीय वस्तुएं चाइना के बाजार में आसानी से नहीं बिक पाती। यह चाइना का दोमुंहा रवैया है।
अब बात करते हैं कि भारत सरकार या भारत के लोग चाइनीस वस्तुओं का बहिष्कार क्यों नहीं कर सकते इसके कुछ कारण है जो इस प्रकार हैं:-
1. चाइनीस वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने पर भारत को चाइना विश्व व्यापार संगठन में घसीट सकता है:- भारत सरकार चाइना की वस्तुओं पर सीधा इसलिए भी प्रतिबंध नहीं लगा सकती क्योंकि इससे दोनों देशों के रिश्ते और भी बिगड़ सकते हैं। दूसरा कोई भी देश किसी देश की वस्तुओं पर सीधे तौर पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। कोई देश ऐसा करता है तो उसको विश्व व्यापार संगठन में घसीटा जा सकता है। लोगों की भावनाओं को देखकर सरकार फैसला नहीं करते उसको उस समय और दुनियादारी देखकर भी फैसला करना पड़ता है।
सरकार ज्यादा से ज्यादा चाइना की वस्तुएं पर अधिक का कर लगा देगी। पर इसके बावजूद भी चाइनीस वस्तुओं का भारतीय बाजार में कब्जा बना रहेगा क्योंकि उसकी मांग अधिक हो जाती हैं।
2. लाखों नौकरियां चली जाएंगे:- चाइना ने भारत में काफी निवेश किया है। चाइना की कई कंपनियां भारत में अपना काम करती हैं। उनके उद्योग भारत में स्थापित हैं इसलिए उन में काम करने वाले अधिकतर भारतीय होते हैं इससे भारत के लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलता है जो चाइनीस वस्तुओं का बहिष्कार करने से खत्म हो जाएगा।
छोटे-मोटे व्यापारी भी चाइना के सस्ते वस्तुओं का प्रयोग कर कर अपना व्यापार करते हैं ।इससे उन्हें काफी लाभ होता है और उनका रोजगार चलता रहता है यदि यह बंद हो गया तो वह नेलाखों छोटे-मोटे व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे।
3. चाइनीस वस्तुओं का बहिष्कार आम लोगों की समझ से परे है:- आप एक मजदूर और एक आम किसान या गरीब को कैसे समझाएंगे की वह चाइना की वस्तुओं का प्रयोग ना करें। उसको क्या पता इससे क्या फर्क पड़ेगा उसको तो अपना काम चलाने से मतलब है। एक आम आदमी यह चाहता है कि उसके जरूरतें पूरी हो जाए उसके जेब के अनुसार यानी उसका काम हो जाए कम पैसे में। वह सबसे पहले अपनी जेब देखेगा उसके हिसाब से वह वस्तुओं का चयन करेगा।
4. 90 % भारतीयों को पता ही नहीं कौन सी वस्तु चाइना की है:- यह समस्या इसलिए भी जटिल और हो जाती है क्योंकि 90% भारतीयों को यही नहीं पता है कि कौन सी वस्तु चाइना की है और कौन सी वस्तु देश की है। जब तक व्यक्तियो को ये ही नहीं पता चलेगा कि कौन सी वस्तु चाइना की है तो वह बहिष्कार कैसे कर सकता है। इसके लिए सभी लोगों को जमीनी स्तर तक काम करना पड़ेगा जागरूकता लाने के लिए।
5. बड़ी स्टार्टअप कंपनियां डूब जाएंगे:- चाइना ने भारत की 15 स्टार्टअप कंपनियों में निवेश कर रखा है। यह 15 स्टार्टअप कंपनियां काफी बड़ी कंपनियां मानी जाती हैं। यदि चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार कर दिया जाए तो चाइना अपना निवेश इन कंपनियों से निकाल लेगा और कंपनियां डूब जाएंगी।
6.वस्तुओं की महंगाई बढ़ जाएगी:- जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि चाइना की वस्तुएं दूसरे देशों की वस्तुओं की तुलना में बहुत सस्ती होती है इसलिए बड़ी संख्या में व्यापारी और लोग उसको खरीदते हैं यदि अचानक से भारतीय बाजार में सेना की वस्तुओं की कमी हो जाए तो इसका असर यह होगा कि बाजार में अचानक महंगाई बढ़ जाएगी।
7. चाइना की वस्तुओं का अभी विकल्प नहीं है:- वर्तमान समय भारतीय बाजार में चाइना की वस्तुओं का अभी विकल्प नहीं है। चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करने से पहले हमें इसकी वस्तुओं का एक आंकड़ा तैयार करना पड़ेगा जो उसकी वस्तुओं के विकल्प के तौर पर प्रयोग किया जा सके। यदि ऐसा हो गया तो हम बहुत ही जल्दी चाइना की वस्तुओं का हमेशा के लिए बहिष्कार कर देंगे।
उपरोक्त कारणों के कारण भारतीय बाजार से चाइना की वस्तुओं का आसानी से निकल जाना आसान नहीं होगा और फिलहाल के लिए पूरी तरह से चाइना का वस्तुओं का बहिष्कार करना भारत के लिए भी हितकारी नहीं होगा यह बेशक थोड़ा कड़वा है पर कहना तो पड़ेगा क्योंकि वर्तमान की स्थिति यही कहती है।
भारत वासियों के बहिष्कार से क्या चाइना की अर्थव्यवस्था गिर जाएगी:- आपने देखा होगा कई लोगों ने सोशल मीडिया पर और सड़कों पर बड़े-बड़े अक्षरों में यह लिखा है कि अगर भारतीय चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार कर देंगे तो चाइना की अर्थव्यवस्था गिर जाएगी या उसकी कमर टूट जाएगी। ऐसे बहुत सारे संदेश बनाकर व्हाट्सएप और फेसबुक में शेयर किए जा रहे हैं। पर हकीकत में ऐसा कुछ होने वाला नहीं क्योंकि चाइना भारत को सिर्फ अपना 3% ही माल बेचता है। बाकी का 97% अन्य देशों को बेचता है। तो आप खुद ही सोचे हैं ऐसा करने से क्या चाइना की को कुछ नुकसान होगा।
अब बात करते हैं उन 90% लोगों के बारे में जो नौटंकी करते हैं:- मेरे इस बात से अगर किसी को बुरा लगा हो या उनकी भावनाओं को आहत पहुंचा हो तो मैं इसके लिए सर्वप्रथम क्षमा चाहता हूं। मैं बात नहीं करता पर कहना पड़ रहा है क्योंकि चाइनीस वस्तुओं का बहिष्कार करना यह कोई नई बात नहीं है। यह बात 1962 की है जब भारत और चाइना में युद्ध हुआ और चाइना जीत गया, उसमें भी देश में यह आवाज उठ रही थी कि चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार किया जाए। क्योंकि इस युद्ध में हमारे हजारों सैनिक शहीद हुए ,घायल हुए और बंदी बनाए गए। जैसे जैसे समय बीता लोगों का गुस्सा भी शांत हो गया और चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करना भी बंद हो गया।
1967 में नाथूला और चोला चाइना और भारत के बीच संघर्ष हुआ। इस संघर्ष में हमारे 88 सैनिक शहीद हुए और चाइना के 400 सैनिक मारे गए कहीं-कहीं संख्या 380 बताई जाती है। उस समय भी चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करना शुरू हुआ। कुछ समय के लिए खूब चला कि चाइना के वस्तुओं का बहिष्कार करना है। परंतु समय के साथ यह बहिष्कार जोशी ठंडा पड़ गया और भारतीय बाजार में चाइना के हिस्सेदारी बढ़ती गई।
2017 डोकलाम में चाइना और भारत की सेनाओं का फिर सामना होगा। पर शुक्र है इसमें बातचीत से ही मामला हल कर लिया गया। उस समय भी लाखों भारतीय रोड और सोशल मीडिया पर या प्रचार करने लगे की चाइनीस वस्तुओं का बहिष्कार करें यही सच्चा देश प्रेम होगा परंतु ऊपर आप आंकड़े देख चुके हैं इसका कुछ असर नहीं हुआ और चाइना की हिस्सेदारी भारत में बढ़ती गई।
अब 2020 में हमारे 20 जवान शहीद हो गए तो फिर देश में चाइना की वस्तुएं का बहिष्कार करने की एक लहर चली है यह लहर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक जोरू शोरो पर चलाई जा रही है। यहां तक समाचार चैनल भी इसका हिस्सा बन गए हैं और जोर-जोर से कह रहे हैं चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार किया जाए। परंतु यह सब नौटंकी है क्योंकि आपको मैं इतिहास बता चुका हूं इतने सालों से चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार किया जा रहा है पर नतीजा क्या निकला 70% क्षेत्रों में चाइना का कब्जा हो गया है भारतीय बाजार में। असलियत यह है कि जो लोग चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करने की बात करते हैं वो लोग दिनभर चाइना की वस्तु को गाली देते हैं और अगली सुबह चाइना की वस्तु का प्रयोग कर लेते हैं। जो न्यूज़ चैनल जोर-जोर से चिल्लाते हैं कि चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करो परंतु वही न्यूज़ चैनल अपने न्यूज़ चैनल पर चाइना की वस्तुओं का प्रचार करते हैं। सरकारी भी बड़ी बड़ी बातें करती है परंतु उसने अब तक ऐसा कोई नियम नहीं बनाया जिससे चाइना की वस्तुओं का भारतीय बाजार में आना बंद हो जाय।
ऐसा नहीं है कि हमारे देश में चाइनीस वस्तुओं का मुकाबला करने के लिए भारतीय वस्तुएं नहीं है। कुछ चाइनीस वस्तुओं को छोड़ दे तो लगभग सभी प्रकार की वस्तुएं हमारे भारत में मौजूद है जो चाइनीस वस्तुओं का मुकाबला कर सकती हैं। पर फिर वही बात 90% भारतीय नौटंकी करते हैं वह भारत की बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग नहीं करते वह सीधे सस्ते वस्तुओं का प्रयोग करने के लिए चाइनीस वस्तुओं का प्रयोग करते हैं। नतीजा यह होता है कि इंटेक्स ,माइक्रोमैक्स जैसी भारतीय कंपनियां बंद हो जाती है और चाइना की कंपनियां बाजार में छा जाते हैं। तो आप ही बताइए यह नौटंकी नहीं है तो क्या है। मेरी नजर में यह नौटंकी ही है। सबसे बड़ा नवटंकी बाज व्यापारी हैं जो कच्चे माल को चाइना से खरीदते हैं और भारत के लोगों के सामने पेश करते हैं। अगर लोगों को चाइना की वस्तुएं बाजार में ना मिले तो वह खरीदेंगे ही नहीं परंतु हमारे व्यापारी और सरकार अधिक लाभ कमाने के लिए वह चाइनीस वस्तुओं को बाजार में लाती है।
यह ऊपर की आतंकवाद वाली तस्वीर देख कर भी लोगों को यह समझ जाना चाहिए क्यों चाइना की वस्तुओं का बहिष्कार करने से सिर्फ चाइना को ही नुकसान नहीं होगा इसका कुछ असर पाकिस्तान पर पड़ेगा जो चाइना का सबसे बड़ा पालतू है। पर अफसोस है मेरे देशवासी इस बात को जल्दी समझते नहीं और समझते भी हैं तो अधिक रुपया कमाने के चक्कर में लालची हो जाते हैं। इसलिए मुझे ऐसे विषयों पर 90% भारतीय नौटंकी वाले लगते हैं।
🙏 जय हिंद जय भारत 🙏
🙏 जय हिंद जय भारत 🙏
भारतीय लोग चाइनीस वस्तु विरोध की नौटंकी करते है
Reviewed by ARJUN KUMAR
on
June 20, 2020
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Reviewed by ARJUN KUMAR
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June 20, 2020
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