आपकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है....

 2 अप्रैल 2020 को केंद्र सरकार करोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए आरोग्य सेतु एप लॉन्च किया। 14 अप्रैल को हमारे  प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा ,"  करोना संक्रमण का फैलाव रोकने में मदद करने के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप जरूर डाउनलोड करें दूसरों को भी इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें"।इसके बाद अब तक 10 करोड़ लोगों ने डाउनलोड कर लिया है।केंद्र सरकार के आंकड़े के अनुसार यह ऐप बहुत अच्छा काम कर रहा है और महामारी से लड़ने में बहुत मदद कर रहा है।
 इसके बाद 4 मई को गृह मंत्रालय ने  तीसरे लॉक डाउन के लिए जारी दिशा निर्देश में साफ कहा कि सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए इस ऐप को डाउनलोड करना अनिवार्य होगा और जो नहीं डाउनलोड करेगा उसको 6 महीने की जेल और हजार रुपए जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
            इसी बीच फ्रेंच हैकर इलियट एल्डर्सन ने चिंता जताई कि भारत में जिन लोगों लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है उनकी निजता अब खतरे में है, हालांकि उसने इसके लिए कोई सबूत पेश नहीं किया, इसके बाद पूरे देश में जोरों शोरों से चर्चा होने लगी कि क्या यह ऐप हमारी निजता के लिए अच्छा है या नहीं।
समस्या यह है कि इस आरोग्य सेतु को जैसे ही हम डाउनलोड करते हैं और इसको अपनी सहमति देते हैं  हमारा डाटा सरकार के पास चला जाता है और ऐसा करने से सरकार हमारा डाटा चोरी होने के जिम्मेवारी से भी हट जाती है क्योंकि हम स्वयं उसकी सहमति दे देते हैं। हम इसमें केवल एक पक्ष नहीं देखेंगे हम दोनों पक्षों का विवरण पेश करेंगे जो लोग इस एेप के खिलाफ हैं और जो लोग इसके समर्थन में है इसके बाद दोनों का निष्कर्ष निकालेंगे।
    आरोग्य सेतु के पक्ष में तर्क-
1.यह करोना वायरस के संक्रमित लोगों की सही जानकारी देता है ।
2. यह संक्रमित और स्वस्थ व्यक्तियों को एक दूसरे से दूर रखता है
3. इससे सरकार को संक्रमित इलाकों की सही जानकारी मिलती है जिससे उन्हें हॉटस्पॉट बनाया जा सकता है।
4. इस तरह का ऐप दूसरे देशों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
5. चाइना और कोरियन देशों ने ऐसे एप्लीकेशन का प्रयोग करके अपने देश में करोना पर विजय प्राप्त की।
6. संक्रमण का फैलाव रोकने से काफी लोगों की जान बच गई।
7. सरकार खुद कहती है कि उसका मकसद सिर्फ करोना  से लड़ने के लिए के लिए  इस एप्लीकेशन को बनाया गया है  उसका लोगों के पर्सनल डाटा से कुछ लेना देना नहीं है।
8. हमारे भारत देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी में यह ऐप काफी मददगार है।
9. जब हम दूसरे एप्लीकेशन के लिए अपनी प्राइवेसी नहीं देखते हैं इसके लिए क्यों देख रहे हैं यह तो देश हित में है।
10. सरकार देशहित में किसी का भी डाटा ले सकती है है, इसे किसी के निजता का उल्लंघन नहीं होगा।
11. जितने भी एप्लीकेशन होते हैं उनको अपनी सहमति देनी पड़ती है तो इस आरोग्य सेतु में कुछ नया तो नहीं है , इसे निजता का उल्लंघन कैसे होगा।
12. इसमें 30 दिन बाद डाटा अपने आप मिट जाता है।
आरोग्य सेतु के विपक्ष में तर्क-
1.हम कहां जाते हैं क्या करते हैं सरकार को यह जानने का अधिकार नहीं है, सरकार हमारी निजता में दखल कैसे दे सकती है।
2.यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के भी खिलाफ है जिसमें यह कहा गया है कि निजता मौलिक अधिकार है
3. यह संविधान के आर्टिकल 21 के खिलाफ है जो हमें आजादी का अवसर देता है।
4. इस एप्लीकेशन का संचालन  कौन सी संस्था या कौन सा मंत्रालय करता है या पक्का किसी को पता नहीं है ।
5. सरकार ने इसके लिए कोई कानून नहीं बनाया है । बिना कानून के  सरकार अपनी मनमानी कर सकती है।
6.  चीन और कोरियन देशों की बात हम नहीं कर सकते क्योंकि वह कम्युनिस्ट पार्टी वाले देश हैं।
8. अमेरिका इंग्लैंड इटली आदि देशों में जो भी इस प्रकार के एप्लीकेशन हैं वह किसी कानून के दायरे में है ।
9. सरकार लोगों के निजी डाटा की जिम्मेदारी क्यों नहीं लेती ।
10.ठीक है राष्ट्र हित में सरकार हमारा डाटा ले सकती है पर इसकी निगरानी तो होनी चाहिए सरकार सही है या गलत।
11. इसी तरह परिवहन मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस में लगने वाले निजी डेटा को दूसरे प्राइवेट कंपनियों को 65 करोड़ो में बेच दिया था, क्या पता है कि इसको भी बेच दे।
12. भारत में निजी जानकारी हेतु कोई भी कानून नहीं है जबकि अन्य देशों में इसका कानून है जो वहां के लोगों को निजता की गारंटी देती है।
13. ठीक है निजी जानकारी 30 दिन में मिट जाएगी पर इस निजी जानकारी की 30 दिन तक की जिम्मेवारी सरकार क्यों नहीं लेती।
14.यह एप्लीकेशन आपकी मर्जी पर निर्भर करता है आप इसमें झूठ ही बोल सकते हैं और यह आपके झूठ को मान भी लेगा।
15. इस एप्लीकेशन में ब्लूटूथ हमेशा खुला रहता है इसे आपके फोन का डाटा कोई दूसरा हैक कर सकता है वह भी आपकी मर्जी के बिना

निजी डेटा होता क्या है?- आप क्या करते हैं ?,कहां जाते हैं किस से मिलते हैं ?, आपको क्या अच्छा लगता है क्या बुरा लगता है?,आपका बैंक अकाउंट क्या है?, आपका पैन कार्ड क्या है? ,आप कीस जगह रहते हैं ?,आपके परिवार में कितने सदस्य हैं? , आप इंटरनेट पर क्या-क्या खोजते हैं क्या क्या देखते हैं क्या सुनते हैं ? इसमें आपकी जिंदगी के जुड़े हुए सारे पहलू शामिल होते हैं , यही होता है आपका पर्सनल डाटा  या निजी डेटा। इसका प्रयोग करके कोई भी आप का इस्तेमाल कर सकता है।
  निजी डेटा चोरी होने के नुकसान- वैसे तो आपकी निजी डेटा चोरी होने से आपके बहुत सारे नुकसान शामिल हैं। कोई  आपके बैंक से पैसे निकलवा सकता है। आपके पास कितनी पूंजी है इसका पता लगा सकता है। और यह आपकी सोच को भी बदल सकता है जैसे मान लीजिए अगर आप भाजपा को समर्थन करते हैं यह सिर्फ आपको भाजपा की अच्छाई दिखाएगा, और कांग्रेस को पसंद करते हैं तो सिर्फ कांग्रेस की अच्छाई दिखाएगा। अगर आप दोनों पार्टियों को ना पसंद करते हैं तो वह आपको सिर्फ उसकी बुराई दिखाएगा। यानी आप खुद से यह निर्णय नहीं कर पाएंगे कि कौन अच्छा है कौन बुरा है।
          इसका ताजा उदाहरण यह है कि जब अमेरिका में चुनाव हुआ और जब इंग्लैंड यूरोप संघ से अलग होने का चुनाव  हुआ तो दोनों चुनाव में पर्सनल डाटा चोरी करने का बहुत बड़ा आरोप लगा और यह भी आरोप लगा कि पर्सनल डाटा चोरी होने से इन दोनों का चुनाव परिणाम बदल गया। डोनाल्ड ट्रंप इसी चुनाव में जीत के आए थे। फेसबुक पर भी यूरोपियन संघ ने करोड़ो डॉलर का जुर्माना लगाया था डाटा चोरी करने पर।
निष्कर्ष-   बेशक आज आरोग्य सेतु एप्लीकेशन  जैसे एप्लीकेशन कि हमारे देश में बहुत आवश्यकता है। इसकी आवश्यकता सरकार और लोगों दोनों की है। पर सरकार को लोगों की निजता का भी ध्यान रखना चाहिए। देश में कोई नया कानून हो या लोकहित में कोई कार्यक्रम हो यह जरूरी है कि वह कानून के दायरे में हो। इससे सरकार और लोगों में आपसी विश्वास बढ़ता है।
    अतः इस महामारी के संकट में हम सबको आपस में मिलकर इस महामारी से लड़ना है। इसलिए हमें एक दूसरे के सहयोग की जरूरत है। सरकार  को यह जाना चाहिए कि दूसरे देशों में निजी डेटा का कानून है तो सरकार को अपने देश में भी इस तरह का कोई कानून बनाना चाहिए जो लोगों की निजता  को सुरक्षा प्रदान करें करें।
आपकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है.... आपकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है.... Reviewed by ARJUN KUMAR on May 12, 2020 Rating: 5

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